आखर री औकात, पृष्ठ- 19

नूंवी बीनणी
-नित बाड़ी बधावो
-शाप तो ना द्यो
०००

दाग तो देवां
कित्तीक ताळ चेतै
आवणो अठै
०००

काळ रा पग
सूका बिरछ पान
हवा सूं खिरै
०००

आंख्यां धसगी
धोरा : जाणै पीळियो
बधतो जावै
०००

थारा उमावा
लीलगी कवितावां
रैयग्या फोड़ा
०००

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